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Saturday, 9 July 2011

छम-से इक ख्याल आया

सोया सोया एक समंदर आँखों में जग जाता है
तेरी बात पे कैसा मंज़र आँखों में जग जाता है

रात की तारों वाली चुन्नी, छत पे सिमटी लगती है
ओस में धुलके खुश्बू तेरी मुझसे लिपटी लगती है
आँख मेरी तब चूर नशे में सतरंगी हो जाती है
तेरी कातिल आँख में जब भी हाय, वो खंजर लहराता है...
तेरी बात पे कैसा मंज़र आँखों में जग जाता है
सोया सोया एक समंदर आँखों में जग जाता है

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